श्रीमती पद्मा शुक्ला: व्यक्तिगत सफर, पारिवारिक विरासत और मूल्य

जन्म 2 फरवरी 1930 को लखनऊ में
राज्य स्तरीय शिक्षण प्रशिक्षण प्रवेश परीक्षा मे द्वितीय स्थान
राजकीय छात्रवृत्ति प्राप्त
पिता श्री राम दत्त अवस्थी राजकीय जुबली कॉलेज, लखनऊ के प्रधानाचार्य
पति स्व. राम स्वरूप शुक्ला (पी.सी.एस. (ई.) और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी)
निधन 2 मार्च 2026 को 120/69 लाजपत नगर, कानपुर में 

कानपुर:12 मार्च 2026
श्रीमती पद्मा शुक्ला का जन्म 2 फरवरी 1930 को लखनऊ में हुआ थाऔर उनका निधन 2 मार्च 2026 को 120/69 लाजपत नगर, कानपुर में हुआ—यह एक लंबा और पूर्ण जीवन था, जिसमें उन्होंने शिक्षा, परिवार और समाज के प्रति गहन समर्पण दिखाया। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गृहनगर लखनऊ में हुई, और राज्य स्तरीय शिक्षण प्रशिक्षण प्रवेश परीक्षा मे द्वितीय स्थान प्राप्त कर राजकीय छात्रवृत्ति प्राप्त की थी उनकी बौद्धिक क्षमता और कठोर परिश्रम का स्पष्ट प्रमाण है। यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत सफलता थी, बल्कि परिवार और समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनी। अपने जीवनकाल में, उन्होंने शिक्षा, परिवार और समाज में महत्वपूर्ण योगदान दिया।उनका परिवार बड़ा और सम्मानित था—दो भाई और पांच बहनें। परिवार में कई सदस्यों ने उच्च पदों पर अपनी पहचान बनाई:
भतीजे दुर्गेश माधव अवस्थी (आई.पी.एस. अधिकारी, पूर्व डीजीपी छत्तीसगढ़),
डॉ. विवेक अवस्थी (सी.एम.ओ.),
स्व. डॉ. सचिन अवस्थी डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (आरएमएलआईएमएस) के प्रमुख हड्डी रोग विभाग
बहन डॉ. इंद्रा मिश्रा (सेवानिवृत्त प्रोफेसर लखनऊ विश्वविद्यालय )।
पिता श्री राम दत्त अवस्थी दरभंगा, बनारस, आदी शहरो मे सेवा देने के बाद राजकीय जुबली कॉलेज, लखनऊ के प्रधानाचार्य थे, संस्कृत के विद्वान और लॉर्ड माउंटबेटन के संस्कृत सलाहकार भी रहे। परिवार मूल रूप से महोली का था, और बाद में लखनऊ के कुंडरी रकाबगंज में बस गया।उनका विवाह स्व. राम स्वरूप शुक्ला (पी.सी.एस. (ई.) और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी) से 11 जुलाई 1959 को हुआ। उनके दो पुत्र हैं:डॉ. लोकेश शुक्ला (वरिष्ठ शिक्षा विद्, इंजीनियरिंग में पीएच.डी.),
उनकी पत्नी डॉ. मनीषा शुक्ला (कानपुर विश्वविद्यालय में प्रोफेसर),
दूसरे पुत्र देवेश स्वरूप शुक्ला (उद्योग निदेशालय में वरिष्ठ अधिकारी),
उनकी पत्नी रत्ना शुक्ला (वरिष्ठतम शिक्षिका, पूर्णा देवी इंटर कॉलेज, कानपुर)।परिवार में पोते-पोतियां और प्रपौत्री (अनुष्का, सूर्याश, शिवाश) अध्ययनरत हैं।पद्मा शुक्ला जी का जीवन शिक्षा, सेवा और पारिवारिक मूल्यों का आदर्श उदाहरण है। चुनौतियों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपनी पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनीं। उनका योगदान न केवल परिवार बल्कि समाज में भी गहरा रहा होगा, जैसा कि उनके परिवार के सदस्यों की सफलताओं से झलकता है।यह  उनके स्मृति में एक सुंदर श्रद्धांजलि है। उनके परिवार, विशेष रूप से उनके पुत्र डॉ. लोकेश शुक्ला जी और पूरे परिवार को मेरी गहरी संवेदनाएं। उनकी स्मृति हमेशा जीवित रहेगी और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

डा.अनिता निष्काम, पूर्व निदेशक, राजकीय केन्द्रीय वस्त्र संस्थान, कानपुर

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